हा प्रजे क्व गमिष्यसि ( हे प्रजा अब कहाँ जाओगी )

प्रेम लाल

हा प्रजे क्व गमिष्यसि ( हे प्रजा अब कहाँ जाओगी ) - दिल्ली सतसाहित्य 2011 - 208 पृ

न प्र917ह